तेरी पयाल बाजे माँ जब छम छम

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरी पायल बाजे माँ जब छम छम

छम छम छम छम

बादल गरजे मेघ बरषे,

बिजली ही छम छम छम छम

तेरी.......

हंस चल मृग चाल तुम्हारे

चंद्र बदन अति सोहे माँ जू

माथे पे बिंदिया बिजली सी माँ,

दमक रही दम दम

तेरी.......

काली घटा सभी काले हैं,

केश तुम्हारे माँ जगदम्बे

स्वर्ण मुकुट पर मालिक माँ जू

चमक रहे चम चम

तेरी............

कनक वदन पर लाल चुनरिया,

गगन में चमके जैसे बिजुरिया

नाच रहे सुर नर किन्नर तेरो

रूप निरख अनुपम

तेरी...............

कर में तेरे शस्त्र शुशोभित ,

होते हैं माँ शेर वाली

तेरी सेवा में रहते हैं

राजेन्द्र माँ हर दम

तेरी...........

गीतकार/गायक-राजेन्द्र प्रसाद सोनी

8839262340

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।