है भगवान तेरी माया का भेद समझ ना आया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

है भगवान तेरी माया का भेद समझ नही आया

धरति ओर आकाश बीच मे खम्बा ना दर साया

पल मे रचदे पुश की टपलि पल मे महल चिनाया

पल मे रचदे किला गढ़ सुन्दर सिर पर छतर फिराया

है भगवान तेरी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

चात्रक नार पुत्र बिन तरसे एक पुत्र नही जाया

फूड़ नार सुत नित्का जन्मे जन जन खोदि काया

है भगवान तेरी,,,,,,,,,,,,,,,,,, , ,

पल मे रचदे सुन्दर जवानी चले निरखतो छाया

पल के माइ झर झर रोवे देख भुड़ापा आया

है भगवान तेरी,,,,,,,,,,,,,,,

पल माही जल से जंगल भर दे तेरी अनोखी माया

पिथा राम कवे सुण अणतु हरि से हेत लगाया

है भगवान तेरी माया का ,,,,,,,,

सिंगर , भक्तगण

लेखक , अणतु राम जि रतनगढ़ चूरू राजस्थान

प्रेस्क, संतोष कुमार & राजकुमार कनवारी ( चरु )

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।