ठंडाई की ग्लाससा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ठंडाई की ग्लाससा, में तोह गट गट गटथास्य ,

भजन की मेला में तोह हाँ चुप , थारी म्हारी गास्याी

पिचकारी की धारियां, भीझे म्हांकी साड़ियां

कहूं नंदकिशोर है म्हारो , मत कर तू बदमाशियां

सज धज कर में आवा रंग अबीर गुलाल उड़वा

थारे संग में होली खेला काल मिलला दुबारा

ऐसो रंग चढस्या पूरा साल नहीं में उतारा

नाच गाय कर होली खेला देखा अजब नज़ारा

"शशि" की अभिलाषा होरियाँ गाय गाय रिझाश्या

नित नवा नवा भजन सुना में श्याम धणी ने माणस्यां ी

शशिकला परवाल,, ((वर्मा)

हैदराबाद

8309048989

८३०९०४८९८९

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।