साड्डी प्रीत निमाणी है

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

तेरा प्यार बड़ा ऊँचा,

साड्डी प्रीत निमाणी है,

तुसा प्यार बड़ा दित्ता,

असा कदर ना जाणी है।

बीत गइया बीती बहारां,

याद करां ते रोवां,

तुझ बिन मेरे सतगुरु प्यारे,

हंजुआ दा हार पिरोआ,

नी मैं क्यों कर धीर धरा,

मेरी उमर नादानी है।

तुसा प्यार बड़ा दित्ता,

असा कदर ना जाणी है।

तेरा प्यार बड़ा ऊँचा,

साड्डी प्रीत निमाणी है,

अखा विच तेरा रूप निरला,

दिल विच यादाँ तेरी,

तुझ बिन मेरे सतगुरु प्यारे,

कौन सुनेगा मेरी,

हूँण नाता तोड़ी ना,

साड्डी जींद रुळ जाणी है,

तुसा प्यार बड़ा दित्ता,

असा कदर ना जाणी है।

तेरा प्यार बड़ा ऊँचा,

साड्डी प्रीत निमाणी है,

जल बिन तडपे मीन बेचारी,

चन्न बिन तड़पे चकोरा,

तुज बिन तड़पे यह मन मेरा,

सह ना सकूँ बिछोड़ा,

मैं किस नाल प्यार करा,

सारी दुनियाँ बेगानी है,

तेरा प्यार बड़ा ऊँचा,

साड्डी प्रीत निमाणी है,

तुसा प्यार बड़ा दित्ता,

असा कदर ना जाणी है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।