काल पापियों का बन आई आज कालका माई

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जयकारा माँ काली कलकत्ते वाली का

जय हो कलिका माई कलिका

जय हो कलिका माई कलिका

काली माँ काली कालिके परमेश्वरि

सर्व मंगला करे देवी नारायणी नमः स्तुते।।

नैनों से बरसाए ज्वाला पहनी है मुंडो की माला

आज नहीं तीनों लोकों में काली को कोई रोकने वाला

धरती धड़की बिजली कड़की जब तलवार उठाई

काल पापियों का बन आई आज कालका माई ।।

रक्त बीज का रक्त पिया है चंड मुंड संहार दिए

पलक झपकते ही मधु कैटभ मौत के घाट उतार दिए

रण चंडी ने रण भूमि में ऐसी परलह मचाई

काल पापियों का बन आई।।

केश खोलकर किया है ताँडव माँ कलकत्ते वाली ने

आग लगा दी उधर जिधर भी दो पल देखा काली ने

भस्म कर दिया उसे देखके जिसने भी की परछाई

काल पापियों का बन आई।।

क्रोध देख कर महाँकाली का महाँकाल घबराए

लेट गए चंडी की राह में सूझा नही उपाए

शिव को चरणों में जब देखा तब तलवार गिराई

मुस्करा कर बोले भोले तेरी जय हो कालका माई।।

नैनों से बरसाए ज्वाला पहनी है मुंडो की माला

आज नहीं तीनों लोकों में काली को कोई रोकने वाला

धरती धड़की बिजली कड़की जब तलवार उठाई

काल पापियों का बन आई आज कालका माई ।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।