ओ बाबा सिंदूरी रंग मत न लगावे

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

ओ बाबा सिंदूरी रंग मत न लगावे

तेरे नजर लाग जावेगी,

नमक मिर्च करते करते

माँ अंजनी हार जावेगी,

ओ बाबा सिंदूरी रंग .......

लाखो भगत तेरे धाम पे आवे दिन और रात में

कोई टोक मार जाएगा तेरे बाता बाता में

अंजनी माँ भी हो जा दुखी ऐसी बाता में

काला काला काजल लाना पड़ जा आंख्या में

तेरी भोली सूरत बाबा भक्त ने भा गयी

ओ बाबा सिंदूरी रंग मत........

तन्ने सच कहो तो बा तेरी करामात तेरी न्यारी

मेरा जनम जनम तक साथ निभाई

तेरे सबके चमन खिला रहे राखे

राजी राखी दुनिया सारी

करिश्मा बेटी बाला जी

ताने गाके बतला रही

तन्ने उत्तम पलवल वाले पे

कृपा घनी आ गयी।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।