इक बार बुला लो शिर्डी

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

इक बार बुला लो शिर्डी साईं हम है तेरे दीवाने

सारी दुनिया गम दिल साईं बस गम तू पहचाने

इक बार बुला लो शिर्डी साईं हम है तेरे दीवाने

रो रो कर केह दूंगा साईं दुखडे सारे अपने

जो देखे पल में सारे वो चूर हुए वो सपने

माफ़ करो मेरी गलती जो

हुई जाने अन जाने

इक बार बुला लो शिर्डी ........

तेरी लीला न्यारी साईं तेरे खेल निराले

दर पे तुम्हारे जो पोंछे वो होते है किस्मत वाले

दर्द समज ते हो साईं तुम जग क्या दर्द को जाने

इक बार बुला लो शिर्डी ...........

दर पे तुम्हारे जो आये संग झोली भर ले जाए

मस्त रहे बस मस्त रहे जो गीत ख़ुशी के गाये

गली गली और दर दर जा कर गाये तेरे अफ़साने

इक बार बुला लो शिर्डी साईं हम है तेरे दीवाने

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।