तेरा करती रहूं मैं सुबह शाम शुकराना

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॥ पावन पाठ ॥

शुकराना शुकराना शुकराना शुकराना

तेरा करती रहूं मैं सुबह शाम,

शुकराना शुकराना शुकराना शुकराना

गुरूजी गुरूजी तेरा शुकराना शुकराना

ऐसी तो मुझमे कोई बात ना थी,

इतनी तो मेरी ओकात ना थी,

जितना दिया है तूने,

तेरे दर पर अब तो है मर जाना,

शुकराना शुकराना शुकराना शुकराना

करवा ए जिंदगी में नूर तेरा है,

सारी कायनात में शरूर तेरा है,

काफरा तू कर दे फ़कीर सब नूं,

रहमो करम ये जरूर तेरा है,

अरजों में आरज़ू में शामिल है तू,

तेरी भक्ति में डूबा है तेरा दीवाना,

शुकराना शुकराना शुकराना शुकराना

मेहर तेरी दिल से रंग बरसे,

जो भी चाहा मैंने मिला तेरे दर से,

गुज़ारिश है दासों की तेरे गुरूजी,

हाथ ना उठाना कभी सर से,

दिल में दिमाग में तो रूप तेरा है,

साँसों में बजे तेरे नाम का तराना,

शुकराना शुकराना शुकराना शुकराना

बेदर्द जमाने ने रुलाया मुझको,

तनहा समझ कर सताया मुझको,

अब कोई जिंदगी में गम ना रहा,

गले जबसे तुमने लगाया मुझको,

वारी वारी जाऊँ तेरी महिमा के मैं,

तूने मुझपे लुटाया ख़ुशी का ख़जाना,

शुकराना शुकराना शुकराना शुकराना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।