युग युग बीते लेते लेते साईं नाम

अनूप जलोटा
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॥ पावन पाठ ॥

युग युग बीते लेते लेते साईं नाम तुम कब बुलाओ गे अपने धाम,

जीने में अब कोई अर्थ ना रहा लगे सारा जीवन वेअर्थ ही रहा,

मतलबी जहान में मेरा नही कोई कम ,

तुम कब भुलाओ गे अपने धाम....

अपनों ने हमको समजा ना अपना गेरो के सहारे जीएगे अब ना,

वैसे भी यह ज़िन्दगी की ढल चुकी है शाम,

तुम कब भुलाओ गे अपने धाम.....

मेरा यह जीवन तुज्को है अर्पण तेरे दवार पर काटे बाकि कुछ शन,

साईं तेरा दवार ही आखरी हो मक़ाम,

तुम कब भुलाओ गे अपने धाम.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।