मन्द मन्द मुसका दे कान्हा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मन्द मन्द मुसका दे कान्हा,

नयनन बान चला दे कान्हा,

मुरली मधुर बजा दे कान्हा,

सुर लय तान सुना दे कान्हा,

मन्द मन्द मुसका---------

प्रीत की रीत सीखा दे कान्हा,

मन का मीत बना दे कान्हा,

संग ग्वालन धूम मचा दे कान्हा,

गोपिन संग रास रचा दे कान्हा,

मन्द मन्द मुसका--------

नवउमंग नवरंग दे कान्हा,

नवजीवन, नवतरंग दे कान्हा,

निश्छल भक्ति से भर दे कान्हा,

माया तृष्णा सब हर ले कान्हा,

मन्द मन्द मुसका----------

पद पंकज नेह लगा दे कान्हा,

प्रेम सुधा बरसा दे कान्हा,

अविरल भक्ति जगा दे कान्हा,

भव से पार लगा दे कान्हा,

मन्द मन्द मुसका---------

रचना आभार: ज्योति नारायण पाठक,

वाराणसी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।