लागी मेरी तेरे संग लगी मेरे शंकरा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ओ बाबा तेरी क्या ही बात है

भोले शंकरा तेरी क्या ही बात है

दूर होके भी तू साथ है

ओ दूर होके भी तू साथ है

खुद को मैं करदूंगा तुझको समर्पण

मैं तेरा आंसू हूँ तू मेरा दर्पण

तेरे ही होने मेरी साड़ी जिंदगी सधी है

लागी मेरी तेरे संग लगी मेरे शंकरा

लागी मेरी तेरे संग लगी मेरे शंकरा

लागी मेरी प्रीत तेरे संग मेरे शंकरा

लागी मेरी प्रीत तेरे संग मेरे शंकरा

तू पिता है मेरा और तुहि रहेगा

मेरी हर गलती को तू हंस के सहेगा

तेरे ताप से मन का उड़ गया है पंछी

सब तेरी बदौलत है आज ये रघुवंशी

तुहि सूक्ष्म है और तुहि विशाल है

तू ही उत्तर है और तुहि सवाल है

तुहि सत्य है है बाकी जिंदगी विनाश की है

लागी मेरी तेरे संग लगी मेरे शंकरा

लागी मेरी तेरे संग लगी मेरे शंकरा

लागी मेरी प्रीत तेरे संग मेरे शंकरा

लागी मेरी प्रीत तेरे संग मेरे शंकरा

ध्यान में है मगन तन पे ओढ़ के रे चोली

मुझे अपने रंग में रंगले संग खेल मेरे होली

ना आसान है निचे ना है कोई खटोली

मुझे अपने रंग में रंग दे संग खेल मेरे होली

बस भी करो मेरे शंकरा

भांग रगड़ के बोली ये गोरा

तुम नहीं राजी है गोरा लोट के राजी है

लागी मेरी तेरे संग लगी मेरे शंकरा

लागी मेरी तेरे संग लगी मेरे शंकरा

लागी मेरी प्रीत तेरे संग मेरे शंकरा

लागी मेरी प्रीत तेरे संग मेरे शंकरा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।