मेरे सर पे सदा तेरा हाथ रहे

पारंपरिक
श्री राम भजन साईं भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

जिसने भी तेरे कदमो पे, सर को झुकाया है

मेरे शिरडी वाले बाबा तूने, गले से लगाया है

ओ बाबा तेरे कदमो पे, करता हूँ फरियाद मैं

सारे जहान ने ठुकराया, तो आया तेरे पास मैं

करुणा का सागर तूँ, दया का भंडार है

माँ की ममता तूँ ही, पिता का प्यार है

मेरे सर पे सदा तेरा हाथ रहे

ॐ साईं राम

हो मेरे सर पे सदा तेरा हाथ रहे

साईं बाबा तूँ हमेशा मेरे साथ रहे

जैसे ज्योति प्रकाश दोनों साथ रहे

शिरडी वाले तूँ हमेशा मेरे पास रहे

ऐ मालिक जिसने भी तेरा, नाम ही लिया है

तूने उसका सारा, घर भर दिया है

अंधे को दिखाया तूने, लंगड़े को दौड़ाया है

उजड़ी हुई दुनियां तुने, फिर से वसाया है

मेरी नईया बीच में, किनारा चाहिए

ऐ बाबा मुझे बस, इतना सहारा चाहिए

अंधेरों में जैसे, चिराग रहे

ॐ साईं राम

हो अंधेरों में जैसे, चिराग रहे

साईं बाबा तूँ हमेशा मेरे साथ रहे

हो मेरे सर पे सदा तेरा हाथ रहे

साईं बाबा तूँ हमेशा मेरे साथ रहे

जैसे ज्योति प्रकाश दोनों साथ रहे

शिरडी वाले तूँ हमेशा मेरे पास रहे

एक ही जगह साँचा, सारे संसार में

सब कुछ मिल जाता है, तेरे दरबार में

सोया हुआ नसीब, फिर से जाग जाता है

भूत प्रेत दुष्टों का, साया भाग जाता है

साधु सिकंदर, न दुनियां का कमाल दे

ऐ मालिक मेरी झोली में, इतना ही डाल दे

हो चाहे धन और दौलत, न पास रहे

ॐ साईं राम

हो चाहे धन और दौलत, न पास रहे

साईं बाबा तूँ हमेशा मेरे साथ रहे

हो मेरे सर पे सदा तेरा हाथ रहे

साईं बाबा तूँ हमेशा मेरे साथ रहे

जैसे ज्योति प्रकाश दोनों साथ रहे

शिरडी वाले तूँ हमेशा मेरे पास रहे

जिसको भी मेरे बाबा, तुझ पर ऐतबार है

उसके लिए तो हर दिन, मानो एक त्यौहार है

तूँ ही बाबा भोला है, तूँ ही बाबा मौला है

किसीने मसीहा तुझको तो किसी ने, नानक जी बोला है

तुझको आता देना बाबा, मुझको आता लेना

मेरे लिए बाबा बस, इतना ही कर देना

हो मेरे सर पे सदा, तेरा हाथ रहे

ॐ साईं राम

हो मेरे सर पे सदा, तेरा हाथ रहे

साईं बाबा तूँ हमेशा मेरे साथ रहे

जैसे ज्योति प्रकाश दोनों साथ रहे

शिरडी वाले तूँ हमेशा मेरे पास रहे

साईं बाबा तूँ हमेशा मेरे साथ रहे

शिरडी वाले तूँ हमेशा मेरे पास रहे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।