अरे जा रे नटखट

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

अटक-अटक झटपट पनघट पर

चटक मटक इक नार नवेली

गोरी-गोरी ग्वालन की छोरी चली

चोरी चोरी मुख मोरी मोरी मुसकाये अलबेली

कँकरी गले में मारी कंकरी कन्हैये ने

पकरी बाँह और की अटखेली

भरी पिचकारी मारी (सारारारारा)

भोली पनिहारी बोली

अरे जा रे हट नटखट

ना छू रे मेरा घूँघट

पलट के दूँगी आज तुझे गाली रे

अरे जा रे हट नटखट...

मुझे समझो न तुम भोली-भाली रे

आया होली का त्यौहार

उड़े रंग की बौछार

तू है नार नखरेदार मतवाली रे

आज मीठी लगे है तेरी गाली रे

तक-तक ना मार पिचकारी की धार

कोमल बदन सह सके ना ये मार

तू है अनाड़ी, बड़ा ही गँवार

कजरे में तूने अबीर दिया डार

तेरी झकझोरी से, बाज़ आयी होरी से

चोर तेरी चोरी निराली रे

मुझे समझो ना तुम भोली-भाली रे

अरे जा रे हट नटखट...

धरती है लाल आज, अम्बर है लाल

उड़ने दे गोरी गालों का गुलाल

मत लाज का आज घूँघट निकाल

दे दिल की धड़कन पे, धिनक धिनक ताल

झाँझ बजे चंग बजे, संग में मृदंग बजे

अंग में उमंग खुशियाली रे

आज मीठी लगे है तेरी गाली रे

अरे जा रे हट नटखट

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।