हर रूप में रंग में ढंग में तू

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विष्णु भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

हर रूप रंग में ढंग में तूँ

नहरों नदियों में तरंग में तूँ,

है परम् पिता जगदीश हरे

प्रभु प्रेम उमंग में तूँ ही तूँ,

तूँ बनकर सूर्य प्रकाश करे,

कहीं शीतल चाँद का रूप धरे,

तारों में तेरा रूप सुघर,

तट नीर तरंग में तूँ ही तूँ,

हर रूप...........

कहीं पर्वत पेड़ समुद्र बना,

तूँ वीज बना बन जीव जना ,

कहीं ,शीत पवन बनकर के बहे,

बस मीन बिहंग में तूँ ही तूँ,

हर रुप.....

तेरा सात स्वरों में है रूप मधुर,

बन कृष्ण धरे मुरली को अधर,

राजेंन्द्र कहे है परम् पिता,

मेरे अंग में संग में तूँ ही तूँ,

हर रूप.........

गीतकार एवं स्वर -राजेन्द्र प्रसाद सोनी

8839262340

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।