दे दो अब दर्शन तिहारे, आए हैं चरणों में तुम्हारे

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॥ पावन पाठ ॥

दे दो अब दर्शन तिहारे, आए हैं चरणों में तुम्हारे,

दास ये तेरे, दर पे आए, चरणों में तेरे अर्ज करे हैं,

दुखड़े मिटा दो तुम हमारे ।

दे दो अब दर्शन तिहारे, आए हैं चरणों में तुम्हारे,

बीच भंवर में डूब रहे हैं, तेरी करुणा जो हो जाए,

मिल जाये कश्ती को किनारे ।।

दे दो अब दर्शन तिहारे, आए हैं चरणों में तुम्हारे..

ये वीतरागी मुरत तेरी, मन को लुभाती सुरत तेरी,

आंखे हमारी दरश को प्यासी, आए हैं तेरे दर पे पुजारी ।

तुम्हारे चरण, करके नमन, भाग जागेंगे अब हमारे,

दे दो अब दर्शन तिहारे, आए हैं चरणों में तुम्हारे ।।

कोई ना जाए आके यहां से, कर्म खपाए सेवा करके,

हम तो तेरे दास जनम से, घेरे हमको पाप घने में ।

दयालु प्रभु, कृपालु प्रभु, दे दो अब हमको तुम सहारे,

दे दो अब दर्शन तिहारे, आए हैं चरणों में तुम्हारे ।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।