मेहर करो सांवरिया नजर करो सांवरिया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेहर करो सांवरिया नजर करो सांवरिया

शरण पड़े हम सांवरिया खबर तो लो सांवरिया

हमने सुना सच्चा बड़ा दरबार तेरा ओ सांवरिया

मेहर करो सांवरिया नजर करो सांवरिया

हारे हुए है दर आए है करो अब मेहर की नज़र,

बनो सांवरे मेरा तुम हमसफर,

हारें हुए है दर आए है करो अब मेहर की नज़र

हमदर्द तुमसा ना कोई जहाँ में,

तो दर्द ये सुनाऊँ अब कहाँ मैं,

भटका हूँ सांवरे तू ठिकाना मेरा,

जादू अब कोई तू दिखाना तेरा,

विश्वास है ये तेरी रहमतें ये,

होगी कभी भी ना बेअसर,

बनो सांवरे मेरा तुम हमसफर,

हारें हुए है दर आए है,

करो अब मेहर की नज़र

हर बार ही विफल हम रहे है,

लड़खड़ाते मगर चल रहे है,

मंजिल का दो पता अब हमें सांवरे,

साथी सा बन मिलो अब मेरी राह में,

तेरी रोशनी से श्याम मंजिलों की,

दिखने लगेगी डगर बनो सांवरे मेरा,

तुम हमसफर हारें हुए है दर आए है,

करो अब मेहर की नज़र

होगा भला ओ बाबा हमारा मिल गया जो,

तुम्हारा एक इशारा रातों को अब मेरी,

एक नई भोर दे निर्मल की अर्जी पे,

सांवरे गौर दे तेरे आसरे में,

तेरे पास हूँ मैं ले लो ना मेरी अब खबर,

बनो सांवरे मेरा तुम हमसफर,

हारें हुए है दर आए है,

करो अब मेहर की नज़र

हारे हुए है दर आए है करो अब मेहर की नज़र,

बनो सांवरे मेरा तुम हमसफर,

हारें हुए है दर आए है करो अब मेहर की नज़र

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।