राजी राजी राखो बाबा फिर थारे दर पे आवा जी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

राजी राजी राखो बाबा फिर थारे दर पे आवा जी,

भूल चूक म्हारी माफ़ करो फिर थारा दर्शन पावां जी,

राजी राजी राखों बाबा फिर थारे दर पे आवा जी………….

सारी दुनिया पे है बाबा कैसी विपदा छाई जी,

कैसी विपदा छाई जी कैसी विपदा छाई जी,

पालनहार के आगे बाबा सबने अर्ज लगाई जी,

एक आसरो थारो बाबा थाने अर्ज लगावा जी,

राजी राजी राखों बाबा फिर थारे दर पे आवा जी…………..

धीरज छुट्यो जाये बाबा आंख्या बरसे नीर जी,

आंख्या बरसे नीर जी आंख्या बरसे नीर जी,

थारे सिवा अब कौन बंधावे म्हाने आके धीर जी,

लीले चढ़के आओ बाबा रो रो थाने बुलावा जी,

राजी राजी राखों बाबा फिर थारे दर पे आवा जी…………..

या दुनिया भी करे हंसाई सगा संबंधी ऐंठ गया,

बोली मारे थारा बाबा मंदिर भीतर बैठ गया,

अटल भरोसा था पे बाबा नैना कदे डिगावा जी,

राजी राजी राखों बाबा फिर थारे दर पे आवा जी…………

रोज रोज थारो सुपणो देखूं जद जद जी घबरावे जी,

प्रेम्या के घर जाकर तू तो मोरछड़ी लहरावे जी,

रोमी के घर आजा बाबा थाने भजन सुणावा जी,

राजी राजी राखों बाबा फिर थारे दर पे आवा जी………….

राजी राजी राखो बाबा फिर थारे दर पे आवा जी,

थारे दर पे आवा जी थारे दर पे आवा जी,

भूल चूक म्हारी माफ़ करो फिर थारा दर्शन पावां जी,

राजी राजी राखों बाबा फिर थारे दर पे आवा जी………

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।