हे शिवशंकर भक्ति की ज्योति अब तो जला दो मन में

राजेन्द्र प्रसाद सोनी
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

है शिव शंकर भक्ति की ज्योति

अब तो जला दो मन में।

राग द्वेष से कलुषित ये मन।

उज्ज्वल हो पल छिन में।।

तेरी डमरू से निकले है

ओमकार स्वर प्रतिपल ।

मै रम जाऊँ तुझमे भगवन

तूँ रम जा नैनन में।।

है शिव..........

भस्म रमाये तन पे तूँ क्यों

इसका राज बतादो।

बीत गये कुछ अब न बीते

बाकी क्षण बातन में।।

है शिव..........

किसका ध्यान धरे कैलाशी

इसका ज्ञान अमर दो ।

तूँ है या फिर ध्यान धरे जो

वो बैठा कण कण में।।

है शिव........

गीतकार-राजेन्द्र प्रसाद सोनी

8839262340

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।