शारदे शारदे वर दे माँ ऐसा एक युग में तो क्या किसी युग में दिया हो न जैसे

राजेन्द्र प्रसाद सोनी
माता दुर्गा भजन विविध भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

शारदे शारदे वर दे मां ऐसा

एक युग मे तो क्या

किसी युग में दिया हो न जैसे।।

शारदे.........

तेज तेरा जगत में समाया

रूप तेरा मेरे मन को भाया।

ज्ञान की जोत से जग सजाया

वीणा वाली में ये गुनगुनाया।।

शारदे.........

वेद हाथों में माँ तेरे भाये

वीणा वाली तू वीणा बजाये।

स्वरमयी तुझको जो नित्य ध्याये

तेरा आशीष वो निष्चय पाये।।

शारदे.....

सात स्वर विराजे तू माता

वीणा कर तेरे मात भाता।

मान सम्मान और ज्ञान पाता

तेरे चरणों के गुण जी भी गाता।।

शारदे.......

गीतकार-राजेन्द्र प्रसाद सोनी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।