लाज राखले मेरे असुवन की

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जय श्री श्याम जय श्री श्याम,

आन पड़ी अब तो तेरे द्वार कन्हैया,

अब तो संकट टार कन्हैया,

अब तो संकट टार कन्हैया,

टूटी हूँ मैं दर्पण सी,

लाज राखले मेरे असुवन की,

लाज राखले मेरे असुवन की…………

मीरा नहीं मैं कर्मा नहीं मैं,

मैं एक दुखिया कलियुग की,

लाज राखले मेरे असुवन की,

लाज राखले मेरे असुवन की……….

तेरे सिवा मैं कुछ ना जानू,

तुमको अपना सब कुछ मानु,

सेवक हूँ तेरे बचपन की,

लाज राखले मेरे अंसुवन की,

लाज राखले मेरे असुवन की………….

तेरी है बस आस रे मोहन,

बाकी है चाँद सांस रे मोहन,

दूर करो ये उलझन सी,

लाज राखले मेरे असुवन की,

लाज राखले मेरे असुवन की………….

बबलू सहे है घाव कन्हैया,

आके बचाले नाव कन्हैया,

डूब ना जाए पूनम की,

लाज राखले मेरे असुवन की,

लाज राखले मेरे असुवन की…………..

मीरा नहीं मैं कर्मा नहीं मैं,

मैं एक दुखिया कलियुग की,

लाज राखले मेरे असुवन की,

लाज राखले मेरे असुवन की………

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।