मार लो डुबकी मार लो डुबकी गंगा बहती नाम की

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन विविध भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मार लो डुबकी मार लो डुबकी गंगा बहती नाम की

राम का नाम ना तूने लिया श्याम का नाम ना तूने लिया

तो ये काया किस काम की

मार लो डुबकी मार लो डुबकी गंगा बहती नाम की।

दो दिन का ये जीवन अपना इस पर क्यों इतराता है

कदम कदम पर ठोकर खाता चैन नहीं पता है

सुबह हुई तो शुक्र प्रभु का खबर नहीं है शाम की

मार लो डुबकी मार लो डुबकी गंगा बहती नाम की।

कोड़ी कोड़ी माया जोड़ी सभी यहीं रह जायेगी

नाम की दौलत है प्यारे संग तेरे जो जायेगी

लूटना चाहे लूट लो जितना लुटती है बिन दाम की

मार लो डुबकी मार लो डुबकी गंगा बहती नाम की।

राम का नाम ना तूने लिया श्याम का नाम ना तूने लिया

तो ये काया किस काम की

मार लो डुबकी मार लो डुबकी गंगा बहती नाम की।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।