भोलीसी सुरत माथेपे चंदा देखो चमकता जाए

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोलीसी सुरत माथेपे चंदा देखो चमकता जाए

सदा समाधि में है मगन कही भोला नजर ना आए

जब भक्तो को पडे जरुरत खुद को रोक ना पाए

सागर मंथन के अवसर पर शिवजी विष पी जाए

पीकर विष की गगरी भोला नीलकंठ कहलाये

कोई भी मांगे बुंद तो ये सारा सागर दिखलाए

शिव की लीला बडी अलग है कोई समझ ना पाए

भोलीसी सुरत माथेपे चंदा देखो चमकता जाए

सदा समाधि में मगन कही भोला नजर ना आए

जब भक्तो को को पडे जरुरत खुद को रोक ना पाए

शिव अकाम गुण के है धाम शिव का ही नाम संयम

शिवलीला तो है अगाध तोडे करमो का बंधन

शिव शक्ति से अलग नहीं है संसार का कण कण

शिव का नाम लिए मन मे चलता हूँ मै तो हरदम

भोलीसी सुरत माथेपे चंदा देखो चमकता जाए

सदा समाधि में मगन कही भोला नजर ना आए

जब भक्तोको को पडे जरुरत खुद को रोक ना पाए

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।