मैं पतित पुरातन तेरी शरण

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

मैं पतित पुरातन तेरी शरण

मैं पतित पुरातन तेरी शरण,

निज जान मुझे स्वीकार करो,

हूँ कब कब का साथी तेरा,

युग युग का हल्का भार करो

मैं भिक्षुक हूँ दातार हो तुम,

यह नैय्या खेवनहार हो तुम

इस पार हो तुम, उस पार हो तुम,

चाहो तो बेड़ा पार करो

मैं पतित पुरातन तेरी शरण . . .

मैं कुछ भी भेंट नहीं लाया,

बस खाली हाथ चला आया

अब तक तो तुमने भरमाया,

पर गुपचुप न हर बार करो

मैं पतित पुरातन तेरी शरण . . .

मैं चल न सकूँ तेरी ऊँची डगर,

हाय, झुक न सके मेरा गर्वित सिर

’निर्दोष’ कहूँ मैं, सौ सौ बर,

प्रभु अपनी कृपा इस बार करो ।।

मैं पतित पुरातन तेरी शरण .

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।