अखीयां निमाणीआं दा मान रख लै

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अखीयां निमाणीआं दा मान रख लै

देके तू दीदार मेरी आन रख लै

तेरा ही भरोसा मेनू तेरा ही सहारा

नजरा नु मिल जाए तेरा ही नजारा

चरना च डिगीया दा ध्यान रख लै

देके तू दीदार मेरी आन रख लै

मुद्ता तो आस मैं ता दर्शना दी लाई ऐ,

तू न आई जान लबा उते आई ऐ,

दर्शन देदे भावे प्राण रख ले

देके तू दीदार मेरी आन रख लै

सारा जग दाती मेनू ताने पेया मार दा

चंचन मन मेरा तेनु ही पुकार दा

ना अपने दी मैया शान रखले

देके तू दीदार मेरी आन रख लै

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।