कान्हा जो तू मुस्काया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कान्हा जो तू मुस्काया जो हसना सिखाया मुरजाई कलि खिल गई

खाटू में तेरे जो आये कलाई पकडाए तुम्हारी लाडली श्याम

कैसे भूल पाऊगीमैं बाबा हरी जो तुमने विरानिया,

भूल चली बाबा मैं अपनी हां दुखो की कहानिया

सुन मेरे प्यारे कान्हा तू साथ निभाना

मैं बन गई आप की

बन गया साथ जन्मो का मिले जो दुनिया मुझे नइ

नाम जो कान्हा से जोड़ा नए रिश्तो से बन गई

मेरे श्याम जी पिता है बाबा जी देवता है छवि कृष्ण मित्र की

लिख दिया भजन पूनम ने पुरे दिल से सुना रही

हाथ थाम लो तुम कन्हिया तेरे दर पे मैं आ गई

प्यार जो तूने लुटाया गले से लगाया मैं बन गई आप की

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।