छोड़ दे कलाई मोरी मोहना मुरारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

छोड़ दे कलाई मोरी मोहना मुरारी,

भीज रही सारी नाहीं मार पिचकारी

डाले काहे रंग काहे करे हुड़दंग,

काहे हो गया है श्याम मतवाला,

गोरी बृज बाला मैं तेरा गोपाला बिरज का ग्वाला,

मैं हूँ रंगबाज मुरलिया वाला......

कान्हा तुमको सबक सीखा दूंगी,

जाके मैया से बता दूँगी,

कितना परेशान किया मुझको,

जाके यसोदा माँ को दिखा दूंगी,

राधा मेरी जान ये होली है,

तेरे कान्हा की ये ठिठोली है,

राधा मेरी जान ये होली है,

तेरे कान्हा की ये ठिठोली है,

मुझपे नाराज ना हो पगली,

तू तो पहले से मेरी हो ली है,

छोडूंगी नहीं मैं कान्हा किया तूने तंग मेरा,

अंग अंग तूने रंग डाला गोरी बृज बाला,

मैं तेरा गोपाला बिरज का ग्वाला,

मैं हूँ रंगबाज मुरलिया वाला...

तुम बरसाने में आते हो,

चोरी से मुझे बुलाते हो,

फिर कर के बहाना आते हो,

तुम मुझको बहुत सताते हो,

जब जब फगुआ आता है,

बहु रंग बहारे लाता है,

कैसे मैं तुमसे दूर रहूं,

मेरा रोम रोम हर्षाता है,

छोड़ दे डगर मोहे जाने दे घर,

वरना कर दूंगी मुख काला

गोरी बृज बाला मैं तेरा गोपाला बिरज का ग्वाला,

मैं हूँ रंगबाज मुरलिया वाला

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।