सेठाँ मे सावरो सेठ रे बाकी सब डुप्लीकेट

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दोहा दोलत से धनवान गणा और मन से नहीधनवान,

मनको धणी यो सावरो मे किस बिध करु बखान,

सेठाँ मे सावरो सेठ रे बाकी सब डुप्लीकेट,

सेठ बणयो ऐक नरशी मोटो भक्तों नेवो समझों छोटो

एक समय जद पडियो टोटौ आयो सावल

सैठ सैठाँ मे सावरो

बीरों बण नानी घर आयो छपन करोडँ को भात भरायो

र्दौपदी को चीर बढायो जीकी दुनिया माही फेट सैठाँ मै

सेठाँ मे सावरो सेठ

सीसुपाल सा नामि हारया एक अरज पर गजने तारया

हीरणाकुश सा पापी मारिया मामा कँश समेत

सेठाँ मे सावरो सेठ

साराजग को खातो चाले यो दातारी सबने पाले

करमा सारु सबने देवें कोने लाग लपेट

दो नमबर का सेठ गणेरा नरकाँ जाकाँँ होसी डैरा

मालुणी औ करे सवेरा जग अनधियार समेट समेट

सेठाँ मे सावरो सेठ बाकि सब डुप्लीकेट के

भजन लेखक कृष्ण गोपाल उपाध्याय

mo 9414982066

गांव कासोरिया भीलवाड़ा राजस्थान

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।