चाहे गले मैं नाग

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

चाहे तू तन पे भस्म रमा ले

चाहे गले में नाग फसा ले,

चाहे तू तन पे भस्म रमा ले

तेरे से करुँगी मैं व्याह कोई कुछ नही कर पायेगा

हो गा तू योगी होगा मधारी

भोले तो से प्रीत लगा ली

दूंगी मैं हाथो में हाथ तू मुझको ही व्याहेगा

तेरे से करुँगी मैं व्याह कोई कुछ नही कर पायेगा

मेहल हवेली न चाहू गी जंगल में तेरे संग रेह लुंगी

खा लुंगी मैं चुप चाप जो प्यार से खिलायेगा

तेरे से करुँगी मैं व्याह कोई कुछ नही कर पायेगा

भोले तुझ संग प्रीत लगाई प्यार की तोसे रीत निभाई,

जन्मो का है सार ये प्यार से निभ जाएगा

तेरे से करुँगी मैं व्याह कोई कुछ नही कर पायेगा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।