दूल्हा बने है शिव शम्भु जी आज

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बन ठन देखो चले शिव की बारात

दूल्हा बने है शिव शम्भु जी आज

बाजे नगाड़ा ढोल डमरू का साज

दूल्हा बने है शिव शम्भु जी आज

संग में लेके चले बाराती भुत प्रेत की टोली

शुक शानिषर संग में नाचे नाचे संग अगोड़ी,

हुआ रंगीन आज सबका मिजाल

दूल्हा बने है शिव शम्भु जी आज

भस्म लगाये तन पे पेहले देखो मर्ग की शाला

देख छटा हर कोई ढंग है दूल्हा गजब निराला

नाग गले सिर चंदा का ताज

दूल्हा बने है शिव शम्भु जी आज

कोई गांजा चिलम चडावे भंगिया कोई खाए

ज्योती शर्मा हाथ जोड़ के शिव का भजन सुनाये

किसी के न पैर न किसी के है हार

दूल्हा बने है शिव शम्भु जी आज

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।