शिव जी को एक लोटा जल जो चढ़ाता है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव जी को एक लोटा जल जो चढ़ाता है

बिन मांगे वो बाबा आपसे पाता है

जहां भी हो दरबार मेरे,भी मन को लुभाता है,

सावन में कांवर ले जो कोई आता है

बिन मांगे वो बाबा आपसे पाता है

जहां भी हो दरबार......................

कुंती के पूजित बाबा कुंतेश्वर,

भूवनों की रक्षा के प्यारे भुवनेश्वर

आकर यहां जो जल है चढ़ाता,

मन की मुरादे वह तुमसे पाता

देवों का आपसे भी महादेव सा नाता है

जहां भी हो दरबार........................

महादेवा लोधेश्वर अद्भुत नजारा,

रामेश्वरम श्री राम का प्यारा

पूजे है जिसको सारा जमाना,

रोते हुए मनका खिलखिलाना

दर्शन बिन ना उसको कुछ भी भाता है

जहां भी हो दरबार.........................

काशी के बाबा विश्वेश्वर प्यारे,

नागेश्वर बागेश्वर नाम तुम्हारे

केदारनाथ में धाम तुम्हारा,

टिकैतनगर शिव मंडल हमारा,

इसीलिए तो सचिन दर पर आता है

जहां भी हो दरबार..........................

शिव जी को एक लोटा जल जो चलाता है

बिन मांगे वह बाबा आपसे पाता है

सावन में कांवर ले लो कोई आता है

जहाँ भी हो दरबार मेरे भी मन...........

सिंगर व राइटर:सचिन निगम

Mo.८७५६८२५०७६

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।