शिव जी बोलो तो सही आंखें खोलो तो सही

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव जी बोलो तो सही आंखें खोलो तो सही

आपकी शरण में दासी कब से खड़ी

आप नहीं बोलेंगे तो मैं गंगा बन जाउंगी

गंगा बन जाउंगी जटा में रम जाउंगी

शिव जी बोलो तो सही आंखें खोलो तो सही

आपकी शरण में दासी कब से खड़ी

आप नहीं बोलेंगे तो मैं चन्दा बन जाउंगी

चन्दा बन जाउंगी मस्तक में रम जाउंगी

शिव जी बोलो तो सही आंखें खोलो तो सही

आपकी शरण में दासी कब से खड़ी

आप नहीं बोलेंगे तो मैं बिच्छू बन जाउंगी

बिच्छू बन जाउंगी कानों से लग जाउंगी

शिव जी बोलो तो सही आंखें खोलो तो सही

आपकी शरण में दासी कब से खड़ी

आप नहीं बोलेंगे तो मैं सर्प बन जाउंगी

सर्प बन जाउंगी गले से लग जाउंगी

शिव जी बोलो तो सही आंखें खोलो तो सही

आपकी शरण में दासी कब से खड़ी

आप नहीं बोलेंगे तो मैं बाघाम्बर बन जाउंगी

बाघाम्बर बन जाउंगी अंगों से लग जाउंगी

शिव जी बोलो तो सही आंखें खोलो तो सही

आपकी शरण में दासी कब से खड़ी

आप नहीं बोलेंगे तो मैं डमरू बन जाउंगी

डमरू बन जाउंगी हाथों से लग जाउंगी

शिव जी बोलो तो सही आंखें खोलो तो सही

आपकी शरण में दासी कब से खड़ी

आप नहीं बोलेंगे तो मैं त्रिशूल बन जाउंगी

त्रिशूल बन जाउंगी तो हाथों से लग जाउंगी

शिव जी बोलो तो सही आंखें खोलो तो सही

आपकी शरण में दासी कब से खड़ी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।