धरती सतिया री

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - तुम आये तो आया मुझे...

धरती सतिया री राजस्थान, वहां पे मेरा प्राण बसता,

वहां झुंझुनु है एक धाम, जहां पे मेरा प्राण बसता,

मन करे झुंझुनु में बस जाऊ,

मैया को नित भजन सुनाए,

जाने कब होंगे पुरे अरमान,

जहां पे मेरा प्राण बसता,

जब भी मेरा मन घबराये,

दादी नाम ही पार लगाये,

कष्ट टल जाते लेते ही नाम,

जहां पे मेरा प्राण बसता,

दुनिया में कोई स्वर्ग कहीं है,

झुंझुनूं है, ये बात सही है,

'दिनेश' माने इसे चारों धाम,

जहां पे मेरा प्राण बसता,

Singer & Lyrics - Dinesh Saraogi

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।