मायरो भरण ख चल्या नरसिंह अंजार

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सतिया सत ना छोड़िए सत छोड़े पत जाय,

सत की वानी लक्ष्मी वो फिर मिलेगी आय,

मायरो भरण ख चल्या नरसिंह अंजार ,

सोला सूरदास लई न नानी बाई का द्वार ,

अई जा सावरिया , करू थारो इंतजार ,

देखी न लोग हस साधु की जम्मात ,

नानी बाई की सासु ननद मुंडा धर हाथ ,

मायरो भरग कसो कौड़ी नही पास म ,

याव ख मिलई देग साधु सत्यानाश म ,

आज म्हारी बिगड़ी बनई जा करतार ,

अई जा सावरिया , करू थारो इंतजार ,

थारी भगति म हाऊ तो लुटई गयो सारो ,

अंत म आव म्हारो कोई नी सहारो ,

थारा भरोसा प खेल छे यो सारो ,

नगर अंजार म कोई नी हमारे ,

मारे शरम का हाऊ तो हुइगो तार तार ,

अई जा सावरिया , करू थारो इंतजार ,

प्रहलाद गणिका तुन मीरा ख तारी ,

धन्ना भगत की तुन खेती उबारी ,

केवट की प्रभु तुन चुकई दी उधारी ,

कहा चली गया जब अइ म्हारी बारी ,

अबकी बार बणी जा तू म्हारो मददगार ,

अई जा सावरिया , करू थारो इंतजार ,

जय श्री कृष्ण ।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।