आनंद ही आनंद बरस रह्यो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन गुरुदेव भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आनंद ही आनंद बरस रहियो ,

बलिहारी ऐसे सद गुरु की मन कृष्ण प्रेम को तरस रहो,

धनभाग हमारे गुरु ऐसे मिले,

दर्शन कर मन प्रेम खिले,

अप्राद अनर्थ सब दूर भागे ,

बलिहारी ऐसे सद गुरु ..........

क्या रूप अनोपम तुम पायो हो अखियो में सबकी छाए हो,

तारो के वीच चंदा दरस रहो

बलिहारी ऐसे सद गुरु ......

क्या प्रेम छठा क्या मधुर वाणी,

बरसात ऐसे जैसे निर्मल पानी,

मधुर मधुर शब्द मन बसियो,

बलिहारी ऐसे सद गुरु ........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।