फागुन अधूरा सूरजगढ़ निशान के बिना

पारंपरिक
हनुमान जी भजन खाटू श्याम भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

दरबार अधूरा बाबा का हनुमान के बिना

फागुन अधूरा सूरजगढ़ निशान के बिना

कहती है दुनिया सारी निशान की महिमा भारी

और राह देखते इसकी देखो खुद श्याम बिहारी

है भगत अधूरा जैसे भगवन के बिना

फागुन अधूरा सूरजगढ़ निशान के बिना

नीले नीले अम्बर में जब ये निशान लहराए

खाटू का श्याम धणी भी इसे देख देख मुस्काये

है यज्ञ अधूरा जैसी यजमान के बिना

फागुन अधूरा सूरजगढ़ निशान के बिना

कई शहर घूम के आता फिर खाटू धाम को जाता

वहां शिखर बंद पे सजके मेले की शान बढ़ाता

परिवार अधूरा जैसे संतान के बिना

फागुन अधूरा सूरजगढ़ निशान के बिना

अमरीश अगर तू चाहे जीवन को धन्य बनाना

कपिल इन्दोरिअ संग में सूरजगढ़ ज़रूर आना

दातार अधूरा जैसे कन्यादान के बिना

फागुन अधूरा सूरजगढ़ निशान के बिना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।