दादा तेरी रहमतों का

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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - छुप गया बदली में....

खड़खड़ा जाकर मैं बड़ा हरषाता हुं,

चौमुखा भैरव का दरशन जब पाता हुं,

दादा तेरी रहमतों का, मैं तो कायल हो गया,

देखकर प्यारी सी सुरत, दिल ये घायल हो गया,

ओ दादा रे, मैं तेरा दीवाना

जिन्दगी कांटों सी थी, तुमने बचाया है मुझे,

हर चुभन पर दादा दादा याद आया है मुझे,

मेरे दिल की धड़कनों पर नाम तेरा हो गया,

देखकर प्यारी सी सुरत......

ओ दादा रे, मैं तेरा दीवाना

नाव थी मझधार में पतवार तुम ही बन गये,

मुश्किले जब आयी तो मेरी ढाल तुम ही बन गये,

साथ जो तेरा मिला तो आसां सबकुछ हो गया,

देखकर प्यारी सी सुरत......

ओ दादा, मैं तेरा, दीवाना ।

जिन्दगी में रोशनी तुमने ही लाई है मेरी,

बगिया भी फुलों से तुमने ही सजाई है मेरी,

'ज्योति' का दिल दादा के दर का दीवाना हो गया,

देखकर प्यारी सी सुरत......

ओ दादा मैं तेरा, दीवाना

SINGER - JYOTI AGARWAL

LYRICS - JYOTI AGARWAL

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।