मैं तुझ से तुझे माँगना चाहता हूँ

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॥ पावन पाठ ॥

प्रभु मुझ से पूछो मैं क्या चाहता हूँ,

मैं तुझ से तुझे माँगना चाहता हूँ ।

मुझे खाना पीना पहनना दिया है ।

बहुत घुमने को जमाना दिया है ॥

बहलने को हर इक बहाना दिया है ।

मैं अब तुझ से ही बहलना चाहता हूँ ॥

हर एक रूह में तेरा चमत्कार देखा।

बनाया हुआ तेरा संसार देखा ॥

कई जनम लेकर मैं हर बार देखा ।

मैं अब तुझ को ही देखना चाहता हूँ ॥

तुझे गणिका का कौन सा भाव भाया ।

था सदने की किस बात पर रहम आया ॥

अजामिल के तू किस इशारे पे आया ।

मैं यह राज़ अब जानना चाहता हूँ ॥

गुनाहिओ को होता है दीदार तेरा ।

फिर तो जकीनन ही नंबर है मेरा ॥

बुराईयो का है मेरे दिल में बसेरा ।

मैं हर जुलम की अब सजा चाहता हूँ ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।