अपने दर से दूर

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

अपने दर से दूर किया है क्या तुम्हे अब प्यार नही,

मुझपर हाथ जो नही तेरा क्या ये मेरी हार नही

अपने दर से दूर किया है क्या तुम्हे अब प्यार नही,

तेरी चोकठ की हर सीधी आंसू जल से धोती है

मंदिर के छोटे प्रांगन में सारी दुनिया संयोई है

मेहकी जो सांसो की बगियाँ अब वो रही गुलजार नही

अपने दर से दूर किया है क्या तुम्हे अब प्यार नही,

तू मुख का हर भाव् समज ले मन के भेद का ज्ञाता है

अगर तुझसे कोई नाता जोड़े तू भी उसको निभाता है

कैसे टिक पाऊंगा जग में जो ये तेरा रार नही

अपने दर से दूर किया है क्या तुम्हे अब प्यार नही,

मैंने तुझसे तुझको माँगा

क्या ये मेरा दोष है श्याम

तेरे सुमिरन की धन दोलत बस यही मेरा कोष है श्याम

क्यों तेरे चरणों का बाबा त्यागी ये हक़ दार नही

अपने दर से दूर किया है क्या तुम्हे अब प्यार नही,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।