ऑंखें बंद करूँ या खोलूँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ऑंखें बंद करूँ या खोलूँ, मुझको दर्शन दे देना ॥

दर्शन दे देना, मात मुझे दर्शन दे देना ॥

ऑंखें बंद करूँ या खोलूँ...

मैं नाचीज़ हूँ बन्दा तेरा, तूँ सब की माता है ॥ (मईया)

तेरे हाथ मैं सारी दुनियाँ, मेरे हाथ मैं क्या है ॥

तुझको देखूँ, जिसमे ऐसा, दर्पण दे देना ॥

ऑंखें बंद करूँ या खोलूँ...

मेरे अन्दर तेरी ज्योति, रिश्ता है सदियों का ॥ (मईया)

जैसे इक नाता होता है, सागर से नदियों का ॥

करूँ साधना, तेरी ऐसा, साधन दे देना ॥

ऑंखें बंद करूँ या खोलूँ...

हम सब हैं भक्तन माँ तेरे, तूँ है मात हमारी ॥ (मईया)

एक ही बिनती सुन लो मईया, हम सब शरण तुम्हारी ॥

तेरे दर पे, आते रहें हम, शक्ति दे देना ॥

ऑंखें बंद करूँ या खोलूँ...

एक प्रार्थना तुमसे मईया, मन में आते रहना ॥ (मईया)

हर इक साँस में मईया अपनी, झलक दिखते रहना ॥

अंत समय जब, प्राण तजूं तब, दर्शन दे देना ॥

ऑंखें बंद करूँ या खोलूँ...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।