ऑंखें बंद करूँ या खोलूँ-साईं

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॥ पावन पाठ ॥

ऑंखें बंद करूँ या खोलूँ ll, मुझको दर्शन दे देना ll

दर्शन दे देना, साईं मुझे दर्शन दे देना ll,

ऑंखें बंद करूँ या खोलूँ,,,,,,,,,,,,

मैं नाचीज़ हूँ बन्दा तेरा, तूँ सबका दाता है l

तेरे हाथ मैं सारी दुनियाँ, मेरे हाथ मैं क्या है ll

तुझको देखूं जिसमे ऐसा, दर्पण दे देना,

ऑंखें बंद करूँ या खोलूँ,,,,,,,,,,,,

मेरे अन्दर तेरी लहरें, रिश्ता है सदियों का l

जैसे इक नाता होता है, सागर से नदियों का ll

करूँ साधना तेरी केवल, साधना दे देना,

ऑंखें बंद करूँ या खोलूँ,,,,,,,,,,,,

हम सब हैं सीताएँ तेरी, हम सब राम तुम्हारे l

तेरी कथा सुनते जायेंगे, बाबा तेरे सहारे ll

इस जंगल में चाहे लाखों, रावण दे देना,

ऑंखें बंद करूँ या खोलूँ,,,,,,,,,,,,

मेरी मांग बड़ी साधारण, मन में आते रहियो l

हर इक साँस के पीछे अपनी, झलक दिखलाते रहियो ll

*नाम तेरा ले आखिर तक, वो धड़कन दे देना,

ऑंखें बंद करूँ या खोलूँ,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।