सुमरा गजानंद गणपति

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

प्रथम नमो गुरु आपणा ,और दूजा देव गणेश,

तीजा सुमरू तीन जणा , तो ब्रम्हा विष्णु महेश,

सिंगा जग में जीवता , सेवक सुमरे पास,

जन कारण तन धारियों, ब्रम्ह ज्योति प्रकाश,

गुरुजी का सुमिरन कीजिए , और गुरुजी का धरिए ध्यान,

गुरुजी की सेवा कीजिए , तो मिटे सकल अज्ञान ,

सुमरा गजानंद गणपति , सुमरा गजानंद गणपति

जिनकी माता है रे पार्वती , सुमरा गजानंद गणपति,

रिद्धि सिद्धि के भरतार कहावे रिद्धि सिद्धि के भरतार कहावे,

अरे भाई मंगल है रे मूरती , सुमरा गजानंद गणपति,

सुमरा गजानंद गणपति , सुमरा गजानंद गणपति

मोदक लाडू पूजा तुम्हारी , मोदक लाडू पूजा तुम्हारी,

अरे भाई चढ़ती है रे बिलपत्ती , सुमरा गजानंद गणपति,

सुमरा गजानंद गणपति , सुमरा गजानंद गणपति

कहे जन दल्लू सुनो भाई साधो , कहे जन दल्लू सुनो भाई साधो,

हो म्हारी गुरु चरणन म गति , सुमरा गजानंद गणपति,

सुमरा गजानंद गणपति ,सुमरा गजानंद गणपति,

जय सिंगाजी ।। जय महाराज ।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।