भोले नाथ के अघोरी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

आ गये जी आ गये जी , भोले नाथ के अघोरी

नाथ के अघोरी , शम्भु नाथ के अघोरी

छा गये जी छा गये जी , भोले नाथ के अघोरी

आ गये जी ………..

उड़ रही राख देखो खेल रहे होरी,

बाज रहा धमरु नाचते अघोरी,

भस्मी रमाये रहे जी , भोले नाथ के अघोरी

आ गये जी ………..

भस्म लपेट रहे श्मशानों की,

तन पे सजी है तेरे दीवानों की,

तांडव मचा रहे जी , भोले नाथ के अघोरी

आ गये जी ………..

श्मशानों में देखो रात दिन बैठे,

करते है साधना मुण्डमाल लपेटे,

भूतो को डरा रहे जी , भोले नाथ के अघोरी

आ गये जी ………..

जहर हलाल पिया भोले ने जमाने में,

महिमा हरीश भरी पड़ी है पुराणों में,

मोहन कौशिक झूम रहे जी , भोले नाथ के अघोरी

आ गये जी ……….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।