सारा जग मैं भटक के गुरुवर

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॥ पावन पाठ ॥

सारा जग मैं भटक के गुरुवर

तेरी शरण मैं आया हूँ बिगड़ी बना दे

या तू मिटा दे तेरी शरण मैं आया हूँ,

सारा जग मैं भटक के गुरुवर.....

तेरे नाम का एक सहारा ,

उसको भी ना बिसराओ ,

सारा जग मैं भटक के गुरुवर....

माझी बन के अब तुम संभालो,

मेरी नैया डूब रही है,

सारा जग मैं भटक के गुरुवर....

तेरे हाथ का मैं कठपुतली

जैसे चाहे तू वैसे नचाओ

सारा जग मैं भटक के गुरुवर....

तेरी महिमा मैं ना जानू

मैं हूं लोभी मैं अज्ञानी

जग के सुख के पीछे भागू

तेरे बिना कही सुख ना मिले

गुरुवर मुझको मत बिसराओ

अपना समझ के दास बनाओ

सारा जग मैं भटक के गुरुवर....

मेरी नैया तेरे हवाले

चाहे डुबाये चाहे निकले

सारा जग मैं भटक के गुरुवर....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।