गणपति राखो मेरी लाज-चंचल

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

गणपति राखो मेरी लाज-चंचल

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( सदा भवानी दाहिनी, सिद्धि करे गणेश,

पांचो देव रक्षा करें, ब्रह्मा विष्णु महेश l )

"गणपति राखो, मेरी लाज" ll

पूर्ण कीजो, मेरे काज xll,,,

"गणपति राखो, मेरी लाज" ll -ll

सदा रहे खुशहाल, गणपति लाल,

जो प्रथमें "तुम्हे ध्याए" l

रिद्धि सिद्धि के दाता, ओ भाग्य विधाता,

वो तुमसे "सब कुछ पाए" ll

विनती सुनलो, मेरी आज, xll,,,

"गणपति राखो, मेरी लाज"

हो पूर्ण कीजो, मेरे काज xll,,,

"गणपति राखो, मेरी लाज"

कभी ना टूटे आस, मेरा विश्वाश,

मैं आया "शरण तुम्हारी" l

हे शम्भू कैलाश, प्रभु कृपाल,

तेरी है "महिमा न्यारी" ll

तेरी दया का, मैं मोहताज, xll,,,

"गणपति राखो, मेरी लाज"

पूर्ण कीजो, मेरे काज xll,,,

"गणपति राखो, मेरी लाज"

मूर्ख को दे ज्ञान, सभा में मान,

हो निर्बल "भी बलशाली" l

गौरी पुत्र प्यारे, जगत से न्यारे

है तेरी "शान निराली" ll

तीन लोक में, तुमरा राज़, xll,,,,

"गणपति राखो, मेरी लाज"

हो पूर्ण कीजो, मेरे काज xll,,,

"गणपति राखो, मेरी लाज"

जिसके सर पे हाथ, हो तेरा नाथ,

उसे फिर "कैसा डर है" l

जपे जो तेरा नाम, सुबह और शाम,

तो उसका "नाम अमर है" ll

सब देवों के, तुम सरताज, xll,,,

"गणपति राखो, मेरी लाज"

हो पूर्ण कीजो, मेरे काज xll,,,

"गणपति राखो, मेरी लाज"

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।