तेरी काया की हवेली बन्दे एक दिन डह जाएगी

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॥ पावन पाठ ॥

तेरी काया की हवेली बन्दे एक दिन डह जाएगी

एक दिन डह जाएगी रे बन्दे एक दिन डह जाएगी

कोई रोक ना पाएगा दुनिया बस देखती रह जाएगी

काया को तू रोज सजाता देख देख इसको इतराता

नहीं जानता ये तो धोखा एक दिन दे जाएगी

ये भी करलू वो भी करलू जोड़ जोड़ मैं इतना घर लू

ना हो पूरी तेरे मन की मन में रह जाएगी

जीवन तेरा बचा है थोड़ा रुकता नहीं समय का घोड़ा

एक दिन तुझको तेरी उमरिया अलविदा कह जाएगी

होगा एक दिन काल सिराहने तेरी अजमेरिया एक ना माने

रोक सके ना मौत तुझे बस ठाके ले जाएगी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।