मंदिर के पट सांवरिया कब तू खोले गा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कब तक रहेगा रूठा बाबा कब तू बोलेगा

मंदिर के पट सांवरिया कब तू खोले गा

तेरे होते हमे फिकर क्या बीमारी महामारी से

द्वापर से कलयुग तक काँपे तीन बाण धारी से

मन में है विश्वाश हमारे वो विश्वाश न टोले गा,

मंदिर के पट सांवरिया कब तू खोले गा

हर फागन में आते है हम होली याहा खेलने को

तेरी किरपा की बरसाते बाबा यहाँ देखने को

जैसे पेहले खेला संग में वैसे कब तू खेले गा

मंदिर के पट सांवरिया कब तू खोले गा

तूझे पता है सब कुछ बाबा तू तो सब कुछ जानता है

अपने भगतो की जिद को बाबा तू पहचान ता है

हम भगतो के मन की भावना बाबा कब तक तोलेगा,

मंदिर के पट सांवरिया कब तू खोले गा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।