तकदीर मुझे ले चल महाकाल की बस्ती में

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

उज्जैन में हर रंग के दीवाने मिलेंगे,

आपस में बड़े प्यार से बेगाने मिलेंगे,

हर और से आते हैं दर्शन को सब भगत,

मेरे बाबा महाकाल के दीवाने मिलेंगे,

तकदीर मुझे ले चल ......

क्या जानें कोई क्या है, महाकाल का दरबारा,

सबसे बड़ा है जग में महाकाल का दरबार,

बैठा है धूणी डाले महाकाल मेरा बाबा,

बम बम अलख जगाएं महाकाल मेरा बाबा,

लम्बी लागी कतारे भस्म आरती की देखो,

दूल्हा बना हुआ है महाकाल मेरा बाबा,

तक़दीर मुझे ले चल....

भस्मी लगाए बैठा महाकाल मेरा बाबा,

और भुजंग गले में डाले, महाकाल मेरा बाबा,

कालों का काल हैं जी महा काल मेरा बाबा,

सबसे निहाल है जी महाकाल मेरा बाबा,

तारे कर्म से सबको महाकाल मेरा बाबा,

काटे जो काल सबके, महाकाल मेरा बाबा,

तक़दीर मुझे ले चल .....

मेरी भी कामना है, महाकाल के दर जाऊँ,

जीवन वहीँ गुजारूं कभी लौट के ना आऊँ,

कर सेवा महाकाल की जीवन सफल बनाऊं,

चौखट पे महाकाल की सर अपना मैं झुकाऊँ,

बस रात दिन भजन मैं महाकाल के ही गाऊँ,

तक़दीर मुझे ले चल........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।