औषधि कौन पिलावे

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

औषधि कौन पिलावे

गुरु बिन औषधि कौन पिलावे,

भव व्याधि यह बहुत सतावेसुध बुध सारी भुलावे

गुरु बिन औषधि....

विषय विषम ज्वर अति घबरावे तृष्णा प्यास बढ़ावे

गुरु बिन औषधि....

ऐसो कौन कृपालु जग में आवागमन मिटावे

गुरु बिन औषधि....

आप भुला जग सब भुलावे ऐसो काम न आवे

गुरु बिन औषधि....

होवे का मिल नबज दिखाऊँ अमृत रंग पिलावे

गुरु बिन औषधि....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।