मन में ये विश्वाश लेके आया हु तेरे द्वार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मन में ये विश्वाश लेके आया हु तेरे द्वार करना सपना माँ साकार,

जब भी आऊ दर पे तेरे साथ हो परिवार मिल कर तेरा दीदार

मन में ये विश्वाश लेके आया हु तेरे द्वार करना सपना माँ साकार,

घर हमारे मैया तेरा हो सदा ही वास गूंजे तेरी जय जय कार,

ज्योत जलती रहे सदा ही माँ मेरे घर द्वार करना मुझपे ये उपकार

मन में ये विश्वाश लेके आया हु तेरे द्वार............

घर हमारे रहे न कमी कमी ऐसा दो वरदान घर के भरे रहे भण्डार,

सुंदर फुलवाड़ी के जैसा खिला रहे परिवार करना विनती माँ सवीकार

मन में ये विश्वाश लेके आया हु तेरे द्वार............

जब भी कोई विपता आये सिर पे रखना हाथ करना संकतो से पार

भगती बंधन कभी न टूटे रेहना हर पल साथ तुझसे मेरा घर संसार

मन में ये विश्वाश लेके आया हु तेरे द्वार............

हम पे रखना किरपा बनाये आते रहे तेरे द्वार करते रहे तेरा दीदार,

सदा रहे है सदा रहेगे बन के तेरे दास सुन लो अजीत की ये पुकार

मन में ये विश्वाश लेके आया हु तेरे द्वार............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।