मैया के नवरातो वाली रात है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैया के नवरातो वाली रात है

जागो जगरातो वाली रात है

रोज है दीवाली ये राते है निराली

माता रानी भगतो के साथ है

मैया के नवरातो वाली रात है ....

जागे जो वो पाए सोने वाला पश्ताये

मैया भावाना सभी की देखो जानती,

सिर जो झुकाए माँ को मन से मनाये

मैया हर बात उसकी है मानती,

मैया के दुलारे बोल के जय कारे करनी माँ से जो बात है

मैया के नवरातो वाली रात है

रख के नोराते माँ की ज्योत जो जगाते रखे पुरे साल उनका ख्याल माँ

चोंकी जगराते जो नवरातो में करवाते पुरे करे उनके सवाल माँ

बरसे दुआए दूर हो बलाए रेहमत की घनी बरसात है

मैया के नवरातो वाली रात है

सारा संसार लागे माँ का दरबार गली गली में जय कारे माँ के गूंजते

माँ के सेवादार माँ का करके शिंगार झंडे मैया के उठा के देखो झूमते

मैया की सवारी लागे बड़ी प्यारी भगतो की संग बारात है

मैया के नवरातो वाली रात है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।